पद्य शिक्षण विधियाँ Part 1
परिभाषा :-
आचार्य विश्वनाथ :- रस पूर्ण वाक्य ही काव्य है ।
आचार्य जगन्नाथ :- सुंदर अर्थ बताने वाले शब्द ही पद्य हैं।
HW अर्डेन:- शब्दों से खेलना ही पद्य है ।
पद्य शिक्षण के उद्देश्य
1 अनुभूति
2 सौंदर्य अनुभूति
3 कल्पना शक्ति का विकास
4 पूर्ण मनोयोग के साथ कविता सुनने के योग्य बनाना
5 कविता के प्रति रुचि व प्रेम उत्पन्न करना
6 कविता की विभिन्न शैलियों से परिचय करवाना
7 छंद अलंकार रस आदि का ज्ञान देना
8 छात्रों को अपने देश की संस्कृति धर्म दर्शन आदि की जानकारी देना।
9 गति याति लय भाव अभिनय द्वारा श्लोक पढ़ने में दक्षता प्राप्त करना
10 छंद संबंधी ज्ञान प्राप्त करना
11 सर्जनात्मक शक्ति का विकास करना
12 उच्चारण ज्ञान में दक्षता प्राप्त करना
कविता शिक्षण में छात्रों में रुचि का विकास करने के साधन :-
1 कविता का प्रभावशाली सस्वर वाचन करना
2 कविता कंटेस्ट करके बच्चों को सुनाना
3 विभिन्न उत्सवों पर कविता पाठ का आयोजन करना ।
4 अंत्याक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन करवाना
5 किसी विषय विशेष पर कविता पाठ करवाना ।
6 कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन करवाना।
पद्य शिक्षण की विधियां:-
1 अभिनय विधि :-
यह पद्य शिक्षण की सर्वश्रेष्ठ विधि है क्योंकि इसमें अध्यापक अभिनय व गीत की सहायता से पद का शिक्षण करता है जिससे कक्षा में एक स्वस्थ वातावरण बनता है।
- इसमें बाल गीतों के साथ अभिनय करते हुए कविता का शिक्षण करवाया जाता है ।
- इस विधि में उद्दीपन कौशल का उपयोग किया जाता है ।
- प्राथमिक स्तर के लिए उपयोगी है।
- इस विधि में रस अनुभूति होती है ।
- अतः यह विधि बाल केंद्रित विधि तथा मनोवैज्ञानिक विधि है ।
- इस विधि से स्थाई ज्ञान की प्राप्ति होती है।
2 गीत विधि :-
कविता शिक्षण की सबसे उत्तम प्रणाली गीत विधि को माना गया है क्योंकि इस विधि में कविता में आने वाले उतार-चढ़ाव का ध्यान रखते हुए लय व ताल के साथ कविता का सस्वर वाचन करना है ।
- इस विधि में अध्यापक एक पंक्ति गाता है तथा बाद में विद्यार्थी उसका अनुकरण करते हैं ।
- जैसे :- जॉनी जॉनी यस पापा ॰॰॰॰॰॰ इस कविता को याद कराना।
3 अर्थ बोध प्रणाली :-
- यह विधि गीत प्रणाली से एक स्तर आगे है।
- इस विधि में अध्यापक एक पंक्ति को स्वयं गाता है तथा विद्यार्थी उसका अनुकरण करते हैं बाद में वह उस पंक्ति का अर्थ विद्यार्थियों को समझाता है ।
- इस विधि में गीत का प्रभाह बीच-बीच में रुक जाता है ।
- इसमें कविता को गद्य की तरह पढ़ाया जाता है।
- सबसे नीरस विधि है अतः विद्यार्थियों की रुचि व तारतम्यता में बाधा आती है । यह विधि उच्च प्राथमिक स्तर पर उपयोगी है ।
- यह एक अमनोवैज्ञानिक विधि है।
4 व्याख्यान विधि :-
- इसमें अध्यापक पद्य का वाचन करता है तथा शब्दश: बालकों को अर्थ समझाता है
- इस विधि में केवल अध्यापक ही सक्रिय रहता है ।
- यह विधि माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक स्तर पर उपयोगी है ।
व्याख्यान विधि के तीन चरण होते हैं
1 प्रसंग :- इसमें कवि तथा कविता का परिचय दिया जाता है।
2 व्याख्या :- इसमें कठिन निवारण किया जाता है
प्रवचन द्वारा :-
विलोम शब्द पर्यायवाची द्वारा अर्थ बताया जाता है इसमे सीधा अर्थ नहीं बताया जाता है।
व्याख्या द्वारा :-
दृष्टांत उदाहरण जिससे बालक अर्थ बता दें।
व्याकरण द्वारा :-
संधि समास उपसर्ग आदि के द्वारा अर्थ बताया जाता है ।
3 विषय:- भाव विशेष छंद अलंकार इन के बारे में बताया जाता है ।
यह विधि अमनोवैज्ञानिक विधि है।
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